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Showing posts from 2020

त्यागपुरुष क्रान्तिकारी भगवतीचरण वोहरा

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#भगवतीचरण_वोहरा_जिनके_त्याग_के_आगे_भगतसिंह_को_अपना_बलिदान_तुच्छ_नज़र_आता_था!! #भगवती  वोहरा. (जन्म: 04 जुलाई 1904  - शहादत: 28 मई 1930) #शहादत दिवस पर विशेष: क्रांतिकारी भगवतीचरण वोहरा के निधन पर भगत सिंह के शब्द थे, ‘हमारे तुच्छ बलिदान उस श्रृंखला की कड़ी मात्र होंगे, जिसका सौंदर्य #कॉमरेड भगवतीचरण वोहरा के #आत्मत्याग से निखर उठा है.’ #देश_की_नई_पीढ़ी_को_शायद_ही_मालूम_हो_कि #भगवतीचरण वोहरा भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन के ऐसे अप्रतिम नक्षत्र थे, जिनके गर्वीले आत्मत्याग की आभा में शहीद-ए-आजम भगत सिंह को अपना बलिदान तुच्छ नजर आता था. #वोहरा का अनूठापन इस बात में भी है कि आंदोलन के लेखक, विचारक, संगठक, सिद्धांतकार व प्रचारक और काकोरी से लाहौर तक कई क्रांतिकारी कार्रवाइयों के अभियुक्त होने के बावजूद वे न कभी पुलिस द्वारा पकड़े जा सके और न ही किसी अदालत ने उन्हें कोई सजा सुनाई. बावजूद इसके कि उन्होंने कभी भी पकड़े जाने के डर से उक्त कार्रवाइयों में अपनी भागीदारी नहीं रोकी और अपराजेय आदर्शनिष्ठा, प्रतिबद्धता, साहस और मनोयोग से आखिरी सांस तक भारतमाता की मुक्ति के लक्ष्य के प्रत...

किसान पुत्र जरूर पढ़ें

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#किसानपुत्र जरूर पढें.. शायद आपको पता नहीं होगा हमारा देश चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है, समय समय पर यूरोपियन यूनियन/अमेरिका/ईरान द्वारा लगाये गये तमाम प्रतिबंधों के बावजूद ... आज भी हम वर्ल्ड लार्जेस्ट एक्सपोर्टर हैं बासमती राइस के... मतलब देश अगर विदेशी मुद्रा अर्जित करता है तो किसान के उत्पाद से... भारतीय बासमती के बहुत सारे कन्ससाइनमेंट यूएस/ईयू में क्वालिटी टेस्ट नहीं पास कर पाते हैं... क्यों ? वहाँ पर बैन पेस्टिसाइड की बासमती में उपस्थिती के कारण... पेस्टिसाइड किसान खुद नहीं बनाता... उसे बाजार/व्यापारी देता... किसान को पता भी नहीं होता कौनसा पेस्टिसाइड बैन है... सरकारें उस पेस्टिसाइड के उत्पादन/बिक्री पर रोक लगाती नहीं... अगर लगायें, तो भी बैनड पेस्टिसाइड भी बनिया बेचता रहता है... उसे सिर्फ मुनाफा चाहिये... किसान से बासमती बहुत कम कीमत पर खरीदा जाता है, 1800 से 3000 हजार रुपयेप्रति क्विंटल के बीच... लेकिन एक्सपोर्ट प्राइस 900 से 1150 यूएस डॉलर हैं (एफओबी शिपिंग एयर पोर्ट इन इंडिया) 50 किलो के ... मतलब लगभग 70,000 रुपये 50 किलो के... मतलब 1 लाख 40,000 रुपये प्रति क्विंटल ....

अपनों की तलाश सात समुंदर पार से कौशांबी तक खींच लाई।

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👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍 अपने वंशजों की खोज में यूरोपीय महादीप के एक छोटे देश माल्टा से कौशाम्बी,प्रयागराज,उ.प्र.पहुंचे भारतीय मूल के लोध हेंड्रिक कालका:लोधी राजेश राजपूत 👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍 अंतर्राष्ट्रीय सर्वधर्म अनुयायी लोधी लोधा लोध राजपूत एकता मिशन के अध्यक्ष लोधी राजेश राजपूत के अनुसार  3 मार्च 2020 को यूरोपीय महाद्वीप के छोटे से देश माल्टा में जन्में भारतीय मूल के लोध हेंड्रिक कालका अपने पूर्वजों को खोजते-खोजते उ.प्र.के कौशाम्बी प्रयागराज पहुंच गए।वह काफी मशक्कतों के बाद सिराथू तहसील के उस गांव में भी गए,जहां से वर्षों पहले उनके पुरखों को अंग्रेज सूरीनाम मजदूरी कराने ले गए थे।दादा की जुबानी गांव के बारे में जो सुना था,उसी के आधार पर उन्होंने अपनी खोज शुरू की। हालांकि,अभी हेंड्रिक कालका अपने वंशजों तक तो नहीं पहुंच सके,लेकिन उस मिट्टी को खोज निकाला,जिसमें उनकी जड़े हैं।सिराथू तहसील के कनवार गांव से 1895 में अंग्रेज बड़ी संख्या में गिरमिटिया मजदूरों को अपने साथ सूरीनाम में ले गए,जिसमें सीताराम लोध भी शामिल थे।तमाम यातनाएं झेलते हुए सीताराम लोध ने अपने बच्चों और परि...

"काश मोदी जी अमेरिका को कह पाते कि हम किसी के दबाव में नहीं है।"

#काश इंदिरा की तरह मोदी भी कह पाते, कि कोई भी देश भारत को आदेश देने का दुस्साहस न करे!  #3दिसंबर, 1971... पाकिस्तान ने पश्चिमी भारत के आठ सैनिक अड्डों पर हमला किया। पाकिस्तान की योजना थी कि पहले हमला बोल कर भारत को क्षति पहुंचाई जा सकेगी। लेकिन भारतीय सेना सुरक्षित पीछे हट गई। #प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और जनरल मानेक शॉ इस मौके का इंतजार कर रहे थे। जनरल जेएस अरोड़ा के अभूतपूर्व नेतृत्व में भारतीय सेना ने पूर्वी पाकिस्तान को घेर लिया था।  #राष्ट्रपति निक्सन ने पाकिस्तान की ओर से हस्तक्षेप किया। भारत को आक्रमणकारी घोषित किया, कई तरह के प्रतिबंध थोपे और संयुक्त राष्ट्र में युद्ध विराम का प्रस्ताव ले गए। रूस भारत के साथ खड़ा था, उसने वीटो कर दिया। #निक्सन ने 9 दिसंबर को अमेरिका का सातवां युद्धक बेड़ा भारत की ओर रवाना किया। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कहा, हिन्दुस्तान किसी से नहीं डरता, चाहे सातवां बेड़ा हो या सत्तरवां। #अमेरिका ने सेना वापस लेने का दबाव बनाया तो इंदिरा गांधी ने दो टूक शब्दों में कहा, 'कोई देश भारत को आदेश देने का दुस्साहस न करे।'  #अमेरिका के जवाब...

इजराइल का जन्म........ अरब मुस्लिम देशों का विरोध

अरब देशों की कड़ी आपत्ति के बीच इसराइल का जन्म एक स्वतंत्र देश के रूप में हुआ था. इसराइल को दुनिया भर में अपने अस्तित्व की स्वीकार्यता हासिल करने के लिए काफ़ी संघर्ष करना पड़ा है. 14 मई, 1948 को इसराइल की घोषणा हुई और उसी दिन संयुक्त राष्ट्र संघ ने उसे मान्यता दे दी. तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन ने भी इसराइल को उसी दिन मान्यता दे दी थी. डेविड बेन ग्युरियन इसराइल के पहले प्रधानमंत्री बने. इन्हें ही इसराइल का संस्थापक भी कहा जाता है. तब भारत इसराइल के गठन के ख़िलाफ़ था. भारत को फ़लस्तीन में इसराइल का बनना रास नहीं आया था और उसने संयुक्त राष्ट्र में इसके ख़िलाफ़ वोट किया था. संयुक्त राष्ट्र ने इसराइल और फ़लस्तीन दो राष्ट्र बनाने का प्रस्ताव पास किया था और इसे दो तिहाई बहुमत मिला था. दो नवंबर 1917 को बलफोर घोषणापत्र आया था. भारत ने पहले विरोध किया फिर मान्यता दी यह घोषणापत्र ब्रिटेन की तरफ़ से था जिसमें कहा गया था कि फ़लस्तीन में यहूदियों का नया देश बनेगा. इस घोषणापत्र का अमरीका ने भी समर्थन किया था. हालांकि अमरीकी राष्ट्रपति फ्रैंकलीन डी रुजवेल्ट ने 1945 में आश्वा...
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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस : 8 मार्च 7/8 इतिहास प्राचीन ग्रीस में लीसिसट्राटा नाम की एक महिला ने फ्रेंच क्रांति के दौरान युद्ध समाप्ति की मांग रखते हुए इस आंदोलन की शुरूआत की। फारसी महिलाओं के एक समूह ने वरसेल्स में इस दिन एक मोर्चा निकाला, इस मोर्चे का उद्देश्य युद्ध की वजह से महिलाओं पर बढ़ते हुए अत्याचार को रोकना था। सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका ने न्यूयॉर्क में 1908 में गारमेंट वर्कर्स की हड़ताल को सम्मान देने के लिए इस दिन का चयन किया था। वहीं रूसी महिलाओं ने पहली बार 28 फरवरी को महिला दिवस मनाते हुए पहले विश्व युद्ध का विरोध दर्ज किया था. यूरोप में महिलाओं ने 8 मार्च को पीस ऐक्टिविस्ट्स को सपोर्ट करने के लिए रैलियां की थीं. 1911 में ऑस्ट्रि‍या, डेनमार्क, जर्मनी और स्विटजरलैंड में लाखों महिलाओं द्वारा मताधिकार, सरकारी कार्यकारिणी में जगह, नौकरी में भेदभाव को खत्म करने जैसे कई मुद्दों की मांग को लेकर  रैली निकाली गई। अमेरिका में सोशलिस्ट पार्टी के आह्वान पर, यह दिवस सबसे पहले २८ फ़रवरी १९०९ को मनाया गया। इसके बाद यह फरवरी के आखिरी इतवार के दिन मनाया जाने लगा। १९१० ...

एक भारत ऐसा भी था और हैं.

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महाड़ आंदोलन से महाड़ के सनातनियों की दृष्टि में अछूतों के छूने से चवदार तालाब अशुद्ध हो गया था,इसके लिए सनातनियों नें तालाब को शुद्ध करने की बाकायदा रश्म अदा की,जिसके लिए 108 घड़े जल तालाब से निकालकर बाहर फेंका गया,और गाय का गोबर ,गाय का मूत्र,दही और घी से भरे हुए कुछ घड़े ब्राम्हण पुरोहितों के मंत्रोच्चार के साथ तालाब में उड़ेले गए,और इस तरह तालाब को शुद्ध किया गया,इसके बाद सनातनी लोग पहले की तालाब के पानी का इस्तेमाल करने लगे.    डा.बाबासाहब अम्बेडकर ने अपने विचारों का प्रचार तथा प्रसार करने के लिए 3 अप्रैल 1927 को "बहिष्कृत भारत" नामक पाक्षिक पत्र निकाला,26 जून 1927 के बहिष्कृत भारत अंक में डा बाबासाहब अम्बेडकर नें घोषणा की कि महाड़ के सनातनियों द्वारा तालाब का धार्मिक विधि से शुद्ध किया जाना अछूतो के लिये घोर अपमानजनक है,इसलिए जो अछूत महाड़ के हिंदुओं के इस घृणित कार्य का धिक्कार करना चाहते हैं,वे अपना नाम बहिष्कृत हितकारिणी सभा के दफ्तर में लिखाएं,और इस प्रकार बाबासाहब पुनः सत्याग्रह करने की तैयारी में जुट गए,उन्होंने कहा कि अछूत समाज हिन्दू धर्म के अंतर्गत है या नहीं,...

एन आर सी का खेल

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यह पोस्ट बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पोस्ट पढ़ कर के आप सभी लोगों को पता चल जाएगा कि एनआरसी का जो भूत है और एनआरसी के बाद सीएए का जो क्रियान्वयन किया गया है उसकी वास्तविकता क्या है दरअसल आज के दौर में हमारे देश के लोगों में भावनात्मक चीजें हावी हो गई कोई अपने हिंदुत्व को जगाना चाहता है तो कोई अपने इस्लाम को मजबूत करना चाहता है कोई सिख धर्म का अनुयाई सिख धर्म का विस्तार से आता है तो कोई स्थाई ईसाइयत की भाषा का पुरजोर समर्थन करता है।  होना चाहिए सबका धर्म समान है सब धर्म के डोर में बने हुए लोग हैं और सबको इसकी इजाजत भी है परंतु इसका दायरा भी है और इस दायरे को जो भी लाघने का काम करेगा वही से उसका नुकसान होना शुरु हो जाता। #देश के सभी हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई बौद्ध जैन पारसी यहूदी साथियों, सभी से गुज़ारिश है कि एकबार इसे जरूर पढ़िए। यह उस शख़्स की कहानी है जो सबसे पहले NRC के लिए लड़ाई लड़ी और अपनी पूरी जवानी उसी पागलपन में गुजारने के बाद क्या कह रहे है...जरूर पढ़ें! जी हाँ, जिस आदमी ने अपनी सारी जवानी आसाम से कथित घुसपैठियों को निकालने की मुहिम में लगा दी हो और अंत में वही नि...

तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा

तुम मुझे खून दो, मैं तुम्‍हें आजादी दूंगा....! जय हिन्द। ******************************************* जैसे नारों से आजादी की लड़ाई को नई ऊर्जा देने वाले, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आज ( 23 जनवरी ) जयंती है।  नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत के उन महान स्वतंत्रता सेनानियों में शुमार होते हैं, जिनसे आज के दौर का युवा वर्ग प्रेरणा लेता है।  उनका ‘जय हिन्द’ का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया। ऐसे महान क्रांतिकारी को शत शत नमन।➨"नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में रोचक तथ्य"                   ✍️✍️ होश न उनको था और न ही हमें, आज़ादी भी मिली, संविधान भी बना, कई सरकारें आईं और कई चली भी गईं, लेकिन… किसी ने उसकी सुध लेने की कोशिश नहीं की, जिसने हमारी इस आज़ादी के लिए अपनी ज़िंदगी तक कुर्बान कर दी. कोई कहता है कि उनकी मौत प्लेन क्रैश होने से हुई है, और तो कईयों का कहना है कि उनकी मौत नहीं हुई थी. लेकिन… इसे क़िस्मत का ही खेल कहा जाए, या फ़िर उनकी बदक़िस्मती!, अभी तक उनकी मौत की पुष्टि नहीं हुई है. हम आपको बताने जा रहे है “ 1. आजाद...

"सबका दल युनाइटेड" ने औरैया से जिला अध्यक्ष घोषित किया

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आपको जानकर हर्ष होगा कि "डॉ बृजेश कुमार" जी को "सबका दल युनाइटेड" पार्टी में "जिला अध्यक्ष (चिकित्सा सभा)" औरैया पद पर मनोनीत किया जाता हैं। हमें आशा ही नहीं विश्वास है कि आप "सबका दल युनाइटेड" को मजबूत करते हुए देश का सामाजिक,आर्थिक एवं राजनीतिक विकास करके देश के सभी वर्गों को गतिशील बनाने के लिए ईमानदारी से कार्य करेंगे। लोधी शयाम सिंह राजपूत प्रदेश सचिव युवा सभा सबका दल युनाइटेड (उ.प्र.) 8009753817

सतीप्रथा महिलाओं के लिए एक साजिश थी

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. सतीप्रथा पर प्रतिबंध सन 1823 ईस्वी की घटना है। एक कोंकण समाज  राधाबाई को सती के नाम पर जलाने का प्रबंध किया गया। ओंकारेश्वर के पास उसे चिता पर बैठाया गया। चिता में जब आग लगाई गई। जब राधाबाई चिता की आग को बर्दाश्त नहीं कर पाई। तब वह चिता से बाहर कूद पड़ी। जान बचाने के लिए नदी की तरफ भागी। उसका पूरा शरीर झुलस गया था। फिर भी कोंकणी समाज के लोगों  नें उसे पकड़कर दोबारा चिता में डाल दिया। पुनः भागने पर कोंकणी समाज  नें उसे बांसों से ठेल ठेल कर पुनः जलाने का प्रयास किया। चिता के चारों ओर कोंकणी समाज  बड़े जोर जोर से ढोल पीटकर भजन और मंत्र उच्चारित कर रहे थे। ताकि उसकी चीखें बाहर नहीं जा सकें।घटना के वक़्त वहां से गुजर रहे एक अंग्रेज ने उसे बचाया। शहर में ले जाकर उसका इलाज कराया पर अत्यधिक जलनें के कारण आखिर उसकी तीन दिन बाद मृत्यु हो गयी। इस प्रकार के अमानवीय क्रूर और घृणित कारनामों में हस्तक्षेप करके अंग्रेज अधिकारियों ने उस पर कठोर पाबंदी लगाने का प्रयास किया। कैप्टन राबर्टसन ने ऐलान करवा दिया कि आज के बाद यदि ऐसी घटनाएं दोबारा हुईं तो हत्या समझकर कठोर कार्यवाई की ज...

राष्ट्रीय युवा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

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राष्ट्रीय युवा दिवस की आप सभी देशवासियों को हार्दिक हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। आपका अपना सोनू कुमार लोधी प्रदेश प्रवक्ता सबका दल यूनाइटेड पार्टी उत्तर प्रदेश।

"सबका दल युनाइटेड" का तृतीय स्थापना दिवस बाबरपुर-अजीतमल (औरैया) में बड़ी धूमधाम से मनाया गया.

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आज "सबका दल युनाइटेड" के तृतीय स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में "औरैया जिला" के कर्मठशील, जुझारू एवं पार्टी और समाज के लिए सदैव सेवारत कार्यकर्ताओं ने बड़ी ही धूमधाम से केक काटकर पार्टी का स्थापना दिवस बाबरपुर- अजीतमल (औरैया) में मनाया।  और समाज के सभी तबकों से अपील की, कि "सबका दल युनाइटेड" पिछड़े, वंचित एवं बहुजनों की आवाज बनकर सदैव आपके साथ मिलकर काम करेगी।  स्थापना दिवस में " योग प्रताप सिंह राजपूत " जिला अध्यक्ष युवा सभा (औरैया), सुरेन्द्र सिंह राजपूत विधानसभा सचिव औरैया, वीरेन्द्र सिंह विधानसभा अध्यक्ष युवा सभा (औरैया) इत्यादि कार्यकर्ताओं ने अपने विचार रखें।  एवं पार्टी की नीतियों को घर-घर तक पहुँचाने का संकल्प लिया।              आपका लोधी शयाम सिंह राजपूत प्रदेश सचिव युवा सभा (उ.प्र.)       8009753817

"सबका दल युनाइटेड" के तृतीय स्थापना दिवस पर कार्यकर्ता सम्मेलन "अजीतमल" औरैया (उ.प्र.)

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सभी देश व प्रदेशवासियों को सबका दल यूनाइटेड पार्टी के तृतीय स्थापना दिवस की बहुत बहुत बधाई। माo राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रमोद लोधी जी को भी पार्टी के तृतीय वर्ष पूर्ण होने पर ढेरसारी शुभकामनाएं, हम सभी कार्यकर्ताओं की मेहनत एक दिन जरूर पार्टी को आसमान तक पहुँचायेगी।          आपका लोधी शयाम सिंह राजपूत प्रदेश सचिव युवा सभा (उ.प्र.)

अदभुत छत्तीसगढ़ लेकिन नकारा सरकारें

30 दिसंबर 2019 को हम चांपा से कोरबा जा रहे थे ।   चांपा से जब हम कोरबा के लिए बस से चले रास्ता इतना खराब था, की छत्तीसगढ़ धन और धान्य प्राकृतिक संपदा से भरपूर फला फूला है,। लेकिन यहां जितनी भी सरकारें आई वह सब की सब करप्ट और भ्रष्ट ही हुई है यह हम नहीं कह रहे हैं।  जिस रोड पर बस चल रही थी वह रोड कह रहा था।क्योंकि बस में चलने के बाद यह एहसास हुआ की वास्तविक हम बेशक आज ईकीसवी सदी में जी रहे हैं लेकिन आज भी हिंदुस्तान के अंदर ऐसे कई जगह हैं।  जो आज से 50 साल पीछे हैं समय पीछे नहीं है उन जगहों पर , वह लोग 50 साल पीछे हैं जो जनता जनार्दन उनको वोट देकर उन्हें अपना प्रतिनिधि चुनती है वह जनता 50 साल पीछे जी रही है इतना खराब था । कि बस ऊपर नीचे ऊपर नीचे चल रही थी किसी तरीके से इतनी धूल मिट्टी दी रोड पर सामने का सूझ नहीं रहा था, उसी समय हल्की हल्की हवा चलने लगी वास्तविक ही दिखाई नहीं दे रहा था । रोड पर चलने वाले लोग भी धुंधले दिखाई दे रहे थे रोड के किनारे साइड पर जो मकान या कहीं पर गांव मिल जाते थे । गांव वाले लोगों ने क्या अपने घरों के दरवाजों पर इस तरीके से...