अपनों की तलाश सात समुंदर पार से कौशांबी तक खींच लाई।




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अपने वंशजों की खोज में यूरोपीय महादीप के एक छोटे देश माल्टा से कौशाम्बी,प्रयागराज,उ.प्र.पहुंचे भारतीय मूल के लोध हेंड्रिक कालका:लोधी राजेश राजपूत
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अंतर्राष्ट्रीय सर्वधर्म अनुयायी लोधी लोधा लोध राजपूत एकता मिशन के अध्यक्ष लोधी राजेश राजपूत के अनुसार  3 मार्च 2020 को यूरोपीय महाद्वीप के छोटे से देश माल्टा में जन्में भारतीय मूल के लोध हेंड्रिक कालका अपने पूर्वजों को खोजते-खोजते उ.प्र.के कौशाम्बी प्रयागराज पहुंच गए।वह काफी मशक्कतों के बाद सिराथू तहसील के उस गांव में भी गए,जहां से वर्षों पहले उनके पुरखों को अंग्रेज सूरीनाम मजदूरी कराने ले गए थे।दादा की जुबानी गांव के बारे में जो सुना था,उसी के आधार पर उन्होंने अपनी खोज शुरू की।

हालांकि,अभी हेंड्रिक कालका अपने वंशजों तक तो नहीं पहुंच सके,लेकिन उस मिट्टी को खोज निकाला,जिसमें उनकी जड़े हैं।सिराथू तहसील के कनवार गांव से 1895 में अंग्रेज बड़ी संख्या में गिरमिटिया मजदूरों को अपने साथ सूरीनाम में ले गए,जिसमें सीताराम लोध भी शामिल थे।तमाम यातनाएं झेलते हुए सीताराम लोध ने अपने बच्चों और परिवार का भरण पोषण किया।सीताराम लोध ही हेंड्रिक कालका (74) के दादा थे।

हैंड्रिक ने बताया,जब वह 12 वर्ष के थे,तब उनके दादा का निधन हो गया था।वह बचपन में उनसे अपने पैतृक देश भारत और कौशाम्बी के कनवार गांव के बारे में सुनते आए थे।उनके मन में हमेशा अपने पूर्वजों की अपनी मिट्टी को देखने की लालसा थी।अपने वंशजों से मिलने और उनसे जुड़ने की इच्छा थी।यही वजह थी कि माल्टा में कंपनी डायरेक्टर के पद से रिटायर होने के बाद वह उ.प्र.के प्रयागराज आ पहुंचे।काफी खोजबीन करते हुए जब वह रेलवे लाइन और पुराना पीपल का पेड़ खोजते हुए सिराथू के कनवार गांव पहुंचे,तब सबसे पहले उन्होंने गांव की मिट्टी को माथे से लगाया।लोगों से बातचीत करने पर पता चला कि यहां लोध परिवार के कुछ लोग रहते थे,जो गांव के दूसरे छोर पर नयापुरवा में बस गए हैं।

लोध हेंड्रिक कालका अपने पूर्वजों के गांव में कुछ समाज सेवा के कार्य करना चाहते हैं।गांव में अपने दादा के नाम से स्कूल,सामुदायिक भवन और स्कॉलरशिप की योजना बना रहे हैं।कनवार एक बड़ा गांव है।उनके परिवार से संबंधित लोध जाति के कुछ लोग नयापुरवा में मिले हैं,जो खेतीबाड़ी से जुड़े हैं।वह शीघ्र ही पूरी योजना के साथ माल्टा से फिर अपने पूर्वजों के गांव के विकास के लिए आएंगे।
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