एक भारत ऐसा भी था और हैं.
महाड़ आंदोलन से महाड़ के सनातनियों की दृष्टि में अछूतों के छूने से चवदार तालाब अशुद्ध हो गया था,इसके लिए सनातनियों नें तालाब को शुद्ध करने की बाकायदा रश्म अदा की,जिसके लिए 108 घड़े जल तालाब से निकालकर बाहर फेंका गया,और गाय का गोबर ,गाय का मूत्र,दही और घी से भरे हुए कुछ घड़े ब्राम्हण पुरोहितों के मंत्रोच्चार के साथ तालाब में उड़ेले गए,और इस तरह तालाब को शुद्ध किया गया,इसके बाद सनातनी लोग पहले की तालाब के पानी का इस्तेमाल करने लगे.
डा.बाबासाहब अम्बेडकर ने अपने विचारों का प्रचार तथा प्रसार करने के लिए 3 अप्रैल 1927 को "बहिष्कृत भारत"
नामक पाक्षिक पत्र निकाला,26 जून 1927 के बहिष्कृत भारत अंक में डा बाबासाहब अम्बेडकर नें घोषणा की कि महाड़ के सनातनियों द्वारा तालाब का धार्मिक विधि से शुद्ध किया जाना अछूतो के लिये घोर अपमानजनक है,इसलिए जो अछूत महाड़ के हिंदुओं के इस घृणित कार्य का धिक्कार करना चाहते हैं,वे अपना नाम बहिष्कृत हितकारिणी सभा के दफ्तर में लिखाएं,और इस प्रकार बाबासाहब पुनः सत्याग्रह करने की तैयारी में जुट गए,उन्होंने कहा कि अछूत समाज हिन्दू धर्म के अंतर्गत है या नहीं,इसका फैसला हम हमेशा के लिए करना चाहते हैं.
उधर महाड़ नगरपालिका नें सवर्ण हिंदुओं के दबाव में आकर सन 1924 का वह प्रस्ताव जिसके अनुसार तालाब अछूतों के लिए खुला कर दिया था,4 अगस्त 1927 को रद्द कर दिया गया,नगरमहापालिका का यह कार्य अछूतों के लिए एक चुनौती था,और डा.अम्बेडकर ने इस चुनौती को स्वीकार किया,उन्होंने एक सत्याग्रह समिति की स्थापना की और सत्याग्रह के लिए २५ तथा २६ दिसम्बर की तारीखें निश्चित कीं-----
------मिशन अम्बेडकर ------✊💪भाई मदारी मेहतर की पोस्ट की कापी

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