एन आर सी का खेल
यह पोस्ट बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पोस्ट पढ़ कर के आप सभी लोगों को पता चल जाएगा कि एनआरसी का जो भूत है और एनआरसी के बाद सीएए का जो क्रियान्वयन किया गया है उसकी वास्तविकता क्या है दरअसल आज के दौर में हमारे देश के लोगों में भावनात्मक चीजें हावी हो गई कोई अपने हिंदुत्व को जगाना चाहता है तो कोई अपने इस्लाम को मजबूत करना चाहता है कोई सिख धर्म का अनुयाई सिख धर्म का विस्तार से आता है तो कोई स्थाई ईसाइयत की भाषा का पुरजोर समर्थन करता है।
होना चाहिए सबका धर्म समान है सब धर्म के डोर में बने हुए लोग हैं और सबको इसकी इजाजत भी है परंतु इसका दायरा भी है और इस दायरे को जो भी लाघने का काम करेगा वही से उसका नुकसान होना शुरु हो जाता।
#देश के सभी हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई बौद्ध जैन पारसी यहूदी साथियों,
सभी से गुज़ारिश है कि एकबार इसे जरूर पढ़िए। यह उस शख़्स की कहानी है जो सबसे पहले NRC के लिए लड़ाई लड़ी और अपनी पूरी जवानी उसी पागलपन में गुजारने के बाद क्या कह रहे है...जरूर पढ़ें!
जी हाँ, जिस आदमी ने अपनी सारी जवानी आसाम से कथित घुसपैठियों को निकालने की मुहिम में लगा दी हो और अंत में वही निराश होकर कहे कि एनआरसी हमारी बहुत बड़ी गलती है। हमने एक पागलपन में जिंदगी बर्बाद कर दी तो इसे आप क्या कहेंगे? पढ़िए..
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यह आदमी हैं मृणाल तालुकदार, जो आसाम के जाने-माने पत्रकार हैं और एनआरसी पर इनकी लिखी किताब 'पोस्ट कोलोनियल आसाम का विमोचन' चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने हफ्ता भर पहले दिल्ली में किया है।
इनकी दूसरी किताब,जिसका नाम है - 'एनआरसी का खेल' कुछ दिनों बाद आने वाली है।वह एनआरसी मामले में केंद्र सरकार को सलाह देने वाली कमेटी में भी नामित हैं।वे आल असम स्टूडेंट यूनियन (आसु) से जुड़े रहे।
दस्तक के लिए उनसे लंबी और बहुत खुली चर्चा हुई। उन्होंने कहा मेरी और मेरे जैसे हजारों लोगों की जवानी आसाम से घुसपैठियों को निकालने कि आंदोलन की भेंट चढ़ गई।हममें जोश था मगर होश नहीं था।पता नहीं था कि हम जिनको आसाम से बाहर निकालने के लिए आंदोलन कर रहे हैं उन्हें किस तरह पहचाना जाएगा और उन्हें बाहर करने की प्रक्रिया क्या होगी।
1979 में हमारा आंदोलन शुरू हुआ और 1985 में हम ही आसाम की सरकार थे।प्रफुल्ल महंत हॉस्टल में रहते थे हॉस्टल से सीधे सीएम हाउस में रहने पहुंचे। 5 साल कैसे गुजर गए हमें पता ही नहीं चला।राजीव गांधी ने सही किया कि हमें चुनाव लड़ा कर सत्ता दिलवाई।सत्ता पाकर हमें एहसास हुआ कि सरकार के काम और मजबूरियां क्या होती हैं।
अगला चुनाव हम हारे मगर 5 साल बाद फिर सत्ता में आए।इन दूसरे 5 सालों में भी हमें समझ नहीं आया कि बांग्लादेशियों को पहचानने की प्रक्रिया हो। लोग हमसे और हम अपने आप से निराश थे।मगर घुसपैठियों के खिलाफ हमारी मुहिम जारी थी। बहुत बाद में हमें इसकी प्रक्रिया सुझाई भारत के होम सेक्रेटरी रहे गोपाल कृष्ण पिल्लई ने।उन्होंने हमें समझाया कि आप सब की नागरिकता चेक कराओ।अपने आप की भी नागरिकता चेक कराओ और जो रह जाएं वह बाहरी।
चोर को पकड़ने के लिए क्लास रूम में सभी की तलाशी लेने वाला यह आइडिया हमें खूब जँचा मगर तब नहीं मालूम था कि सवा तीन करोड़ लोग जब कागजों के लिए परेशान इधर-उधर भागेंगे तब क्या होगा?
बाद में रंजन गोगोई ने कानूनी मदद की और खुद इसमें रुचि ली। इसमें आसाम के एक शख्स प्रदीप भुइँया की खास भूमिका रही। वे स्कूल के प्रिंसिपल हैं उन्होंने ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की और अपनी जेब से 60 लाख खर्च किए।बाद में उन्हीं की याचिका पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट एनआरसी के आदेश दिए एक और शख्स अभिजीत शर्मा ने भी एनआरसी के ड्राफ्ट को जारी कराने के लिए खूब भागदौड़ की।तो इस तरह एनआरसी वजूद में आया और वजूद में आते ही हम सब सोचने लगे कि यह हमने क्या कर डाला?
खुद हमारे घर के लोगों के नाम गलत हो गए।सोचिए कैसी बात है कि जो लोग घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए आंदोलन कर रहे हैं उन्हीं के घर वालों के नाम एनआरसी की लिस्ट में नहीं आएं?
बहरहाल यह गलतियां बाद में दूर हुईं। बयालीस हज़ार कर्मचारी 4 साल तक करोड़ों कागजों को जमा करते रहे और उनका वेरिफिकेशन चलता रहा।
आसाम जैसे पागल हो गया था।एक एक कागज की पुष्टि के लिए दूसरे राज्य तक दौड़ लगानी पड़ती थी। जैसे किसी के दादा 1971 के पहले राजस्थान के किसी स्कूल में पढ़े तो उसे दादा का स्कूल सर्टिफिकेट लेने के लिए कई बार राजस्थान जाना पड़ा।लोगों ने लाखों रुपया खर्च किया। सैकड़ों लोगों ने दबाव में आत्महत्या कर ली।कितने ही लाइनों में लगकर मर गए। कितनों को ही इस दबाव में अटैक आया दूसरी बीमारियां हुई।
मैं कह नहीं सकता कि हमने अपने लोगों को कितनी तकलीफ दी।और फिर अंत में हासिल क्या हुआ?पहले चालीस लाख लोग एनआरसी में नहीं आए।अब19 लाख लोग नहीं आ रहे हैं।चलिए मैं कहता हूं अंत में पांच लाख या तीन लाख लोग जाएंगे तो हम उनका क्या करेंगे?
हमने यह सब पहले से नहीं सोचा था।हमें नहीं पता था कि यह समस्या इतनी ज्यादा मानवीय पहलुओं से जुड़ी हुई है।मुझे लगता है की हम इतने लोगों को ना वापस बांग्लादेश भेज सकेंगे जेल में रख सकेंगे और ना ही इतने लोगों को ब्रह्मपुत्र में फेंका जा सकता है।तो अंत में यह निर्णय निकलेगा की वर्क परमिट दिया जाए और एनआरसी से पीछा छुड़ा लिया जाए। केंद्र सरकार दूसरे राज्यों में एनआरसी लाने की बात कर रही है लेकिन उसे आसाम का अनुभव हो चुका है।
कुछ सनकी टाइप के लोग आज भी एनआरसी चिल्लाते रहते हैं परंतु उन्हें खुद ही नहीं पता है कि एनआरसी का वास्तविक तात्पर्य क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक को पारित करते समय अमित शाह जी के बयान को सुनिए और फिर जब विरोध तेज होते हैं फिर उन्हीं के बयान को सुनिए आप सभी लोगों को इन दोनों बयानों से पता चल जाएगा कि एनआरसी और नागरिकता संशोधन विधेयक की वास्तविकता क्या है।
आज क्यों घर घर जाकर के जबरजस्ती लोगों से मोबाइल लेकर के मिस कॉल मरवाया जा रहा है कि एनआरसी का सपोर्ट कर दीजिए नागरिकता संशोधन विधेयक का सपोर्ट कर दीजिए जब आपको पता है कि पूरे देश में इसका विरोध हो रहा है तो फिर क्यों आप नहीं इसमें वापस लेते हैं।
इसको आज नहीं तो कल इसको वापस लेना पड़ेगा ।
जब हमारे संविधान ने सभी लोगों को किसी भी देश से आने वाले लोगों को किसी भी तरीके से प्रताड़ित लोगों को इस देश में नागरिकता देने के प्रावधान किए हैं तो फिर से नए प्रकार की नागरिकता की आवश्यकता क्यों थी।
माननीय मंत्री जी आप बेरोजगारी पर बहस नहीं करने के लिए चुनौती देते हो आप शिक्षा पर बहस के लिए नहीं कहते हो आप स्वास्थ्य पर बहस के लिए नहीं कहते हो आप किसानों की खुदकुशी पर बहस के लिए नहीं कहते हो आप जवानों की शहादत पर पास के लिए नहीं कहते हो आप एनआरसी पर सीए पर बहस करने के लिए कहते हो तो मैंने भी कहा कि आप बहस के लिए तैयार रहिए आप समय स्थान नियुक्त कर लीजिए मैं भी तैयार हूं।
आपसे बात करने के लिए और इस देश के उन तमाम आवाम को इसके द्वारा मालूमात हो जाएंगे की वास्तव में आप सब की मानसिकता क्या है वास्तव में आप इस देश में जहर बो करके मजहब की दीवार खड़ा करके अपना वोट बैंक साधने का काम करते हो आपको सिर्फ अपनी कुर्सी प्यारी है लेकिन आप की कुर्सी की हवस में जो इन मासूमों के ऊपर अत्याचार हो रहा है जोर जुल्म हो रहा है उसको आप सभी लोग नजरअंदाज करते यह गलत है।
सबका दल यूनाइटेड पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पहले ही कॉल किया है कि इस देश में नफरत फैलाने वाले लोगों को स्वीकार नहीं किया जाएगा इस देश में संविधान पर चोट करने वाले लोगों को स्वीकार नहीं किया जाएगा इसलिए आने वाले समय में उन सभी संविधान विरोधी भाई चारा विरोधी संप्रदायिक ताकतों को आईना दिखाने का काम सबका दल यूनाइटेड पार्टी करेगी और पूरीजोर से करेगी।
सोनू कुमार
प्रदेश प्रवक्ता
सबका दल युनाइटेड

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