किसान पुत्र जरूर पढ़ें





#किसानपुत्र जरूर पढें..

शायद आपको पता नहीं होगा हमारा देश चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है, समय समय पर यूरोपियन यूनियन/अमेरिका/ईरान द्वारा लगाये गये तमाम प्रतिबंधों के बावजूद ... आज भी हम वर्ल्ड लार्जेस्ट एक्सपोर्टर हैं बासमती राइस के... मतलब देश अगर विदेशी मुद्रा अर्जित करता है तो किसान के उत्पाद से... भारतीय बासमती के बहुत सारे कन्ससाइनमेंट यूएस/ईयू में क्वालिटी टेस्ट नहीं पास कर पाते हैं... क्यों ? वहाँ पर बैन पेस्टिसाइड की बासमती में उपस्थिती के कारण... पेस्टिसाइड किसान खुद नहीं बनाता... उसे बाजार/व्यापारी देता... किसान को पता भी नहीं होता कौनसा पेस्टिसाइड बैन है... सरकारें उस पेस्टिसाइड के उत्पादन/बिक्री पर रोक लगाती नहीं... अगर लगायें, तो भी बैनड पेस्टिसाइड भी बनिया बेचता रहता है... उसे सिर्फ मुनाफा चाहिये... किसान से बासमती बहुत कम कीमत पर खरीदा जाता है, 1800 से 3000 हजार रुपयेप्रति क्विंटल के बीच... लेकिन एक्सपोर्ट प्राइस 900 से 1150 यूएस डॉलर हैं (एफओबी शिपिंग एयर पोर्ट इन इंडिया) 50 किलो के ... मतलब लगभग 70,000 रुपये 50 किलो के... मतलब 1 लाख 40,000 रुपये प्रति क्विंटल ... मुनाफा कौन खा रहा है ? एक्स्पोर्टर... व्यापारी... पूंजीपति... अगर एक लाख रुपये किसान को एक बोरी बासमती के मिले तो क्या वो लोन लेगा ? क्या वो सरकार से सब्सिडी लेगा ? क्या उसके भी बच्चे कॉनवेंट/पब्लिक स्कूल में नहीं पढ़ेंगे ?

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