लोधी राजपूत क्षत्रिय वंश
अविनाशी, क्षत्रियता का सार l सदा राष्ट्र की सेवा की हैं, न पा सका कोई पार ll करत बात हमसे सरवर की, पीठ दिखावत जात l आदिकाल से लेकर अबतक, करी ने हमने घात ll हाथ मुसरिया कबहु न मारी, करै शान की बात l हाथ पैर न हिले डुले, पर चले शान की बात ll घरे मुसरिया ढंढे मारे, बाहर हांके ढींग l चार आदमी जो ललकारे, नेकर जावे भींग ll लोधी क्षत्रिय की होड़ न करियो, न करें पीठ पर वार l वीर सिंह हिरदेशाह रानी अवंती, जन्मे बड़े बड़े भूप सरदार ll लोधी अंश वंश अविनाशी, क्षत्रियता का सार l सदा राष्ट्र की सेवा की हैं, न पा सका कोई पार ll 📝 Shyamsingh Lodhi Rajput (LR) स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित