बागेश्वर धाम सरकार धीरेन्द्र शास्त्री पाखंड या चमत्कार


आजकल सब चमत्कार और भगवान के चक्कर में  घनचक्कर हैं . वो भी इक्कीसवीं सदी में जब इंसान ने चंद्र से लेकर मंगल तक के सीने पर दस्तक दे दी हैं. 

तब भी आदमी शार्टकट रास्ता अपनाने के लिए, कभी बाबाओं के चक्कर में अपनी खून पसीने की गाढी कमाई और साथ ही इज्जत आबरु भी दांव पर लगा देता हैं. ऐसे पढ़ें लिखे मूर्ख लोगों का भला कल्याण कैसे हो सकता हैं. 

जब कि सब जानते हैं कि बाबाओं को ईश्वर से नहीं धन से मतलब होता हैं. 

आजकल बागेश्वर धाम धीरेन्द्र गर्ग बनिया ने धर्म पाखंड आडम्बर मक्कारी का ऐसा चक्रव्यूह रचा कि अनपढ़ छोड़ो पढा लिखा नौजवान भी पगला गया हैं. 

जबकि सब जानते हैं कि ब्रहामण बनिया बैकवर्ड और दलित को धर्म के दलदल से निकलने देना ही नहीं  चाहता है. 

कितने ही बहुजन महापुरुषों ने इनके लिए कुर्बानी दिये फिर भी पिछड़ा दलित धर्म के चुंगल से आजाद नहीं हो रहा हैं स्वयं. 

जबकि सुहानी शाह ने माइंड रीडिंग कला से बाबा ढाबा बागेश्वर की पोल खोल दी हैं. 

अब जब बाबा ने सोचा पकड़े जायेंगे तो हिन्दुत्व का पांसा फेक दिया. 

अब सोचने की बात हैं कि बहुजन समाज पिछड़ा दलित आदिवासी कब पाखंड और वामनों के चुंगल से आजाद होगा ये तो वक्त बतायेगा. 

(Shyam singh Lodhi Rajput) 

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